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Tuesday, 30 April 2024

क्या तुम

 क्या तुम कभी मेरी 

सुबह का हिस्सा बन पाओगे 


जल्दी- जल्दी तैयार होते 

मेरे अदना सवाल सुन पाओगे 


वो चाय की चुस्कियों के बीच की खामोशियाँ 

उनमें छिपी हज़ार बातों में अपनी आवाज़ मिलाओगे 


 क्या तुम कभी मेरी 

सुबह का हिस्सा बन पाओगे ?


चलो, सुबह तो व्यस्त होती हैं 

शामों के बारे में सोचना 


थक कर लौटते हो जब 

घर के बारे में सोचना 


घर की सारी बातें बेमानी नहीं होती 

सच है, ये बातें रूमानी नहीं होती 

फिर भी होती हैं  जिन्दगी का अहम् हिस्सा


क्या कभी तुम मेरी घरेलु बातें सुन पाओगे ?


क्या कभी तुम मेरी जिन्दगी का हिस्सा बन पाओगे ?


क्या कभी?




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मंज़िल

 क्या होगा जो मंज़िल पे पहुँच गिर जाओगे ?

अपनी मेहनत का कुछ भी नहीं पाओगे l


गुज़र जायेगा परीक्षा का समय 

ऐसे भी , वैसे भी 

जो अपनी जान लगाओगे

तो बाद में नहीं पछताओगे 


कौन जाने तुम क्या हो? 

तुम भी क्या जानो 

मौका मिले तो 

तुम क्या कुछ कर जाओगे 


तुम बने अपनी मेहनत के बल पर 

अडिग रखो इस विश्वास को 

खुद पर रखोगे संशय 

तो बिन ठोकर गिर जाओगे 


दुनिया तो हँसेगी ही 

ऐसे भी और वैसे भी 

तुम हारे तो तुम पर 

और जीते तो तुम संग 


क्या होगा जो मंज़िल पे पहुँच गिर जाओगे ?

अपनी मेहनत का कुछ भी नहीं पाओगे l



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Monday, 26 September 2022

अनचाही बेटी

 हाँ माना 

बेटी हूँ अनचाही 

पर हूँ तो तुम्हारी 

तुम्हारे ही गर्भ से जन्म लिया 


हाँ माना 

कर्णधार था कोई विदेशी

रचा जिसने मुझे तलवार सा 

काटने को बांटने को 

उस भारत को 

जो विश्व अपार था 


" कैसे इस संस्कृति को नष्ट कर दूँ? "

उसके सम्मुख यह प्रश्न विचार था 


हाँ उसने ही स्थापित किया था मुझको 

पर मेरी रगों में रक्त तुम्हारा है 


मुझ नवजात को संभाला तुमने 

विदेशी बोली की छोटी, सौतेली 

बहन बना कर पाला तुमने 

सशक्त किया मेरे जीवन को

महादेवी और निराला ने 


हो गयी हूँ अब 75 बरस की 

क्या अब घर से निकालोगे ?

क्या मेरे आभाव में बिना विघ्न के

नव संस्कृति को संभालोगे ? 

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क्या तुम

 क्या तुम कभी मेरी  सुबह का हिस्सा बन पाओगे  जल्दी- जल्दी तैयार होते  मेरे अदना सवाल सुन पाओगे  वो चाय की चुस्कियों के बीच की खामोशियाँ  उनम...