Showing posts with label #environmental-concerns. Show all posts
Showing posts with label #environmental-concerns. Show all posts

Thursday, 27 May 2021

बरसाती नदी

आज नदी बहुत जल्दी में थी

कल रात की बारिश में 

बहा लायी थी पहाड़ों से

पत्थर , मिट्टी, कंकड़, 

पेड़ और उनकी टहनियाँ


जो बहते जा रहे थे

अटक-अटक कर

 

यूँ अटकलें लगाती

अठखेलियाँ करती

नदी कुछ ज्यादा

 चंचल हो कर 

बह निकली 


ढलानों पर शोर मचा कर 

चौकन्ना करती सबको


बातें करती साथ उड़ती चिड़ियों से 

जैसे कह रही हो -

आज जल्दी में हूँ, 

जो साथ बह रहा है 

उसे पार पहुँचाना है 


Unauthorized (without the explicit written consent of the author of the blog)  use of content on this blog in any form is not permissible.


Wednesday, 26 May 2021

वो शांत सी बहने वाली नदी

 वो शांत सी बहने वाली नदी 

जब पत्थरों से टकरा जाती है

गिरती है आसमानों से तो

धरती को भेद जाती है 


झरना बन कर गिरती नदी 

अपना नया रूप दिखाती है

बंधन में जो न ये बंधना चाहे 

बांधों  को तोड़ जाती है 


जब लेती है बाढ़  का रूप 

सब ध्वस्त कर जाती है

अमृत बन कर प्यास बुझाने वाली

सारी बस्ती को लील जाती है 


वो शांत सी बहने वाली नदी 


जहां रुक जाए  धारा - प्रवाह 

घूम-घूम गोल भंवर बनाती है

कुछ हिस्से यूँ ठहरते हैं 

खुद को हरा रंग दे जाती है 


वो शांत सी बहने वाली नदी 

जब पत्थरों से टकरा जाती है

थोड़ी-सी रुक जाती है

थोड़ी आगे बढ़ जाती है 

 

वो शांत सी बहने वाली नदी 


Unauthorized (without the explicit written consent of the author of the blog)  use of content on this blog in any form is not permissible.



Wednesday, 18 September 2019

वो तालाब गुम हो गया


हमने की थी जहाँ
पिछले साल
छठ- पूजा
वो तालाब गुम हो गया।

कुछ लोग कहते हैं
कि वो है अभी भी
उन ऊँची इमारतों के पीछे
जिनको बनाने के लिए
पाटी गई थी तालाब की जमीन ।

वह अब सड़क से दिखता नहीं
मैंने भी जा कर देखा वहाँ
बिखरा पाया कचरा
जैसे बिखरा है हर जगह
अरावळी में ।

पर फिर भी कुछ ळोग कहते हैं
कि वो तालाब अब भी है
वहीं कहीं ,
छुप गया है शायद
बचाने  के लिए अपने अस्तित्व को।

कुछ लोगों ने उसे जिंदा रखा है
कागजों में,फाइळों में,
और  कुछ ने
अपनी मीठी यादों का
हिस्सा बना कर।

I am taking my blog to the next level with Blogchatter's #MyFriendAlexa.

Unauthorized use of content on this blog in any form is not permissible.

Good Old "Malgudi Days"

 Who still remembers the tune " ta na na na na na na naaaaaaa"? R.K Narayan's stories made for T.V. audience. Literature reach...