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Tuesday, 30 April 2024

क्या तुम

 क्या तुम कभी मेरी 

सुबह का हिस्सा बन पाओगे 


जल्दी- जल्दी तैयार होते 

मेरे अदना सवाल सुन पाओगे 


वो चाय की चुस्कियों के बीच की खामोशियाँ 

उनमें छिपी हज़ार बातों में अपनी आवाज़ मिलाओगे 


 क्या तुम कभी मेरी 

सुबह का हिस्सा बन पाओगे ?


चलो, सुबह तो व्यस्त होती हैं 

शामों के बारे में सोचना 


थक कर लौटते हो जब 

घर के बारे में सोचना 


घर की सारी बातें बेमानी नहीं होती 

सच है, ये बातें रूमानी नहीं होती 

फिर भी होती हैं  जिन्दगी का अहम् हिस्सा


क्या कभी तुम मेरी घरेलु बातें सुन पाओगे ?


क्या कभी तुम मेरी जिन्दगी का हिस्सा बन पाओगे ?


क्या कभी?




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मंज़िल

 क्या होगा जो मंज़िल पे पहुँच गिर जाओगे ?

अपनी मेहनत का कुछ भी नहीं पाओगे l


गुज़र जायेगा परीक्षा का समय 

ऐसे भी , वैसे भी 

जो अपनी जान लगाओगे

तो बाद में नहीं पछताओगे 


कौन जाने तुम क्या हो? 

तुम भी क्या जानो 

मौका मिले तो 

तुम क्या कुछ कर जाओगे 


तुम बने अपनी मेहनत के बल पर 

अडिग रखो इस विश्वास को 

खुद पर रखोगे संशय 

तो बिन ठोकर गिर जाओगे 


दुनिया तो हँसेगी ही 

ऐसे भी और वैसे भी 

तुम हारे तो तुम पर 

और जीते तो तुम संग 


क्या होगा जो मंज़िल पे पहुँच गिर जाओगे ?

अपनी मेहनत का कुछ भी नहीं पाओगे l



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Monday, 13 September 2021

आरज़ू

 कागजों में गुम हुए 

जज़्बात ढूँढ़ते हैं

हम उनके साथ हों तन्हा

फिर से वो हालात  ढूँढ़ते हैं

बस वो हों, उनकी आरज़ू हो

और उन्हीं से  गुफ़्तगू

हम इस जमीं पर 

वो कायनात ढूँढ़ते हैं

कागजों में गुम हुए 

जज़्बात ढूँढ़ते हैं 

Friday, 27 September 2019

आईना



वो शक्स आज क्यों मुझे
बुझा -बुझा सा लगा
जो झांक रहा था मेरी ओर
आईने के उस तरफ से

आईने से झांक के
मेरा अक़्स बोला मुझसे
कितना वक्त गुजर गया
मुझको मिले तुझ से


 ये तो कम होता है कि आईने में
बस अपना अक़्स नज़र आता है
जब झाँकते हैं
एक नया शख़्स नज़र आता है 

I am taking my blog to the next level with Blogchatter's #MyFriendAlexa.


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Good Old "Malgudi Days"

 Who still remembers the tune " ta na na na na na na naaaaaaa"? R.K Narayan's stories made for T.V. audience. Literature reach...